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हम नवयुग की नई भारती, नई आरती !हम स्वराज्य की रिचा नवल, भारत की नवलय हों
नव सूर्योदय, नव चंद्रोदय, हमी नवोदय हों !!
रंग जाति पद भेद रहित, हम सब का एक भगवान हो
संतान हैं धरती माँ की हम, धरती पूजा स्थान हो !
पूजा के खिल रहे कमल दल, हम भव जल में हो
सर्वोदय के नव बसंत के, हमी नवोदय हो !!
मानव हैं हम हलचल हम, प्रकृति के पावन वेश में
खिलें फलें हम में संस्कृति इस, अपने भारत देश की !
हम हिमगिरि हम नदियाँ हम, सागर की लहरें हो
जीवन की मंगलमाटी के, हमी नवोदय हो !!
हरी दूधिया क्रांति शांति के, श्रम के वंदनवार हो
भागीरथ हम धरती माँ के, सूरम पहरेदार हो !
सत शिव सुन्दर की पहचान, बनाए जग में हम
अंतरिक्ष के यान ग्यान के, हमी नवोदय हो !!
हम नवयुग की नई भारती, नई आरती
हम स्वराज्य की रिचा नवल, भारत की नवलय हों!
नव सूर्योदय नव चंद्रोदय, हमी नवोदय हों
हमी नवोदय हो, हमी नवोदय हो, हमी नवोदय हो !!
Regards,
Roushan
